Sunday, June 19

सफ़ेद तकिया |


    मैं सपने लिखता हूँ ,

    मैं सपनो में चलता हूँ ,

...मैं सपनों में रंग भरता हूँ

.मैं सपनों में तस्वीरें बनाता हूँ

    मैं सपनो में उड़ान भरता हूँ .



... जागने से डरता हूँ .....

.हर सुबह..

देखता हूँ उठते ही

मेरी करवटों से सिमटी

वो चादर

....और वो ...सिरहाने की ओर पड़ा ..

सफ़ेद तकिया ....

...जिसे देखते ही ये लगता की मेरे सपनो में भरे रंग .....कभी मेरी आँखों से छिटक के इस सफ़ेद तकिये पे गिरेंगे .......मेरी ज़िन्दगी में भी सपनों के पंख लगेंगे ....मेरे शब्द भी आकाश में उड़ेंगे ! मेरे शब्द भी आकाश में उड़ेंगे !

                 
ख्वाबो की गलियों में कुछ तस्वीरें बटोरनें चला था..  मन  की लहरों में डूबता ख्वाब मिला.. 
 A dream I got.. Drowning in the waves of soul..

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